सीतापुर : नामी प्लाईवुड प्रोडक्ट्स की संपत्ति को लेकर प्रशासनिक व कानूनी गतिविधियां तेज
सीतापुर, फरवरी 2026 : जिलाधिकारी डॉ. राजागणपति आर द्वारा जारी 30 दिवसीय जनसूचना के बाद प्लाईवुड प्रोडक्ट्स की संपत्ति को लेकर प्रशासनिक व कानूनी गतिविधियां तेज हो गई हैं। जनसूचना में स्पष्ट किया गया था कि निर्धारित अवधि में कोई भी पक्ष यदि स्वामित्व के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत नहीं करता है, तो संपत्ति को निष्प्रभु मानते हुए सरकार में निहित करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
इसी क्रम में 26/02/2026 को आदिल जफर एवं आबिद जफर अपने अधिवक्ता के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और फर्म से संबंधित स्वामित्व दस्तावेज प्रस्तुत किए। प्रशासन द्वारा अभिलेखों की जांच के बाद नियमानुसार निर्णय की बात कही गई है।
फर्म का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
बताया जाता है कि फर्म की स्थापना 1939 में हुई थी। प्रारंभिक साझेदारों में मोहम्मद इस्माइल, विजयपथ सिंघानिया, हरिशंकर सिंघानिया एवं गोपाल कृष्ण सिंघानिया शामिल थे। वर्ष 1939 से 1946 तथा 1965 तक विभिन्न वर्षों में फर्म के नाम से भूमि क्रय की गई। समय-समय पर 1949, 1957, 1961, 1964, 1965, 1983, 1984, 1985 और 1990 में साझेदारों में परिवर्तन दर्ज हुए। चर्चा है कि बीच के वर्षों में विदेशी मूल के साझेदार जैसे हेनरी थॉमसन आदि भी फर्म से जुड़े।
बताया जाता है कि वर्ष 1998 में विदेशी मूल के साझेदारों ने अपने शेयर विक्रय कर प्लाईवुड प्रोडक्ट्स से संबंध समाप्त कर देश छोड़ दिया। इसके बाद से फर्म में केवल भारतीय मूल के साझेदार ही शामिल रहे। वर्ष 2000 से सीमा जफरुल्ला, आदिल जफर एवं आबिद जफर फर्म में साझेदार के रूप में दर्ज बताए जाते हैं।
एन.एच 30 चौड़ीकरण में भूमि अधिग्रहण
बताया जाता है कि फर्म की कुछ भूमि राष्ट्रीय राजमार्ग 30 के चौड़ीकरण के दौरान अधिग्रहित की गई थी। जिसका मुआवजा फर्म को प्रदान किया गया था।
कर्मचारियों का 105 करोड़ बकाया मामला
फर्म में कार्यरत रहे कर्मचारियों द्वारा अपने लगभग ₹105 करोड़ के बकाया भुगतान के लिए उच्च न्यायालय में वाद लंबित है। कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों से वेतन, ग्रेच्युटी व अन्य देयकों का भुगतान नहीं हुआ है। कर्मचारी संघ ने 25/02/2026 को जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और अपनी आर्थिक स्थिति से अवगत कराया। संघ ने मांग की है कि संपत्ति से संबंधित किसी भी प्रशासनिक निर्णय से पूर्व कर्मचारियों के बकाया दावों को प्राथमिकता दी जाए।
प्रशासनिक स्थिति
जिलाधिकारी कार्यालय के अनुसार, प्रस्तुत स्वामित्व दस्तावेजों, एनएच-30 अधिग्रहण के रिकॉर्ड तथा कर्मचारियों के दावों—सभी पहलुओं की विधिक जांच की जाएगी। न्यायालय में लंबित प्रकरणों को ध्यान में रखते हुए ही आगे की कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।
प्लाईवुड प्रोडक्ट्स से जुड़ा यह मामला अब स्वामित्व, अधिग्रहण और श्रमिक हितों, तीनों आयामों में महत्वपूर्ण हो गया है, जिस पर जिले के व्यापारिक व श्रमिक वर्ग की निगाहें टिकी हुई है




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