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मुरादाबाद-नगर आयुक्त की 15 की छुट्टी के दौरान 400 से ज़्यादा फाइलें कैसे पास ? जाँच का विषय

मुरादाबाद-नगर आयुक्त की 15 की छुट्टी, मेयर 400 से ज़्यादा फाइलें की पास,वर्क आर्डर भी जारी, ये तो हो गया कमाल, पुराने टेंडर भी पास, सभी हैरान   


मुरादाबाद: पंद्रह दिन की छुट्टी पर गए मुरादाबाद के नगर आयुक्त जब वापस काम पर लौटे तो हैरान रह गए, नगर आयुक्त की अनुपस्थिति में नगर निगम में ऐसे चमत्कार हो चुके थे जो आज तक नगर आयुक्त ने अपनी पूरी सर्विस में नहीं देखे थे, मेयर ने नगर आयुक्त की अनुपस्थिति में महीनों से लटकी चार सौ से ज्यादा अधूरी फाइलों को मंगाकर पास करवा दिया और हाथों हाथ वर्क ऑर्डर भी जारी कर दिए गए, इतना ही नहीं नगर आयुक्त ने जो निविदाएं कम टेंडर के चलते निरस्त करवा दी थी उनको भी बहाल कर पुराने टेंडरों को पास कर दिया गया।

मुरादाबाद नगर निगम मेयर विनोद अग्रवाल और नगर आयुक्त अवनीश शर्मा के बीच चल रहे महाभारत में मैदान बना हुआ नजर आ रहा है, शहर के विकास का दावा करने वाले नगर निगम के मेयर और नगर आयुक्त वर्तमान में एक-दूसरे को नीचा दिखाने के लिए हर हथकंडे अपना रहे है, मौका मिलते ही एक दूसरे पर हमला बोल रहे इन दो दिग्गजों की लड़ाई में नगर निगम पिस रहा है। 

कई महीनों से चल रही इस लड़ाई में अब नगर आयुक्त ने मेयर के खिलाफ मोर्चा खोला है, पंद्रह दिन के चिकित्सीय अवकाश से लौट कर आये नगर आयुक्त उस वक्त हैरान रह गए जब उनकी गैरहाजिरी में मेयर ने निगम अधिकारियों के साथ मिलकर सैकड़ों पेंडिंग फाइलों को स्वीकृत कर वर्क ऑर्डर जारी करा दिए, नगर आयुक्त अवनीश शर्मा के मुताबिक विकास से सम्बंधित 33 निविदाओं पर टेंडर आमंत्रित किये गए थे जिसके बाद निर्माण विभाग के चीफ इंजीनियर ने एक निविदा पर महज दो ई-टेंडर आने का हवाला देकर निविदाओं के लिए दुबारा टेंडर मंगाने की सिफारिश की थी और पूर्व में आये टेंडरों को निरस्त करने को कहा था। नगर आयुक्त द्वारा दुबारा निविदाएं आमंत्रित करने के आदेश देने के वावजूद मेयर पर आरोप है कि उन्होंने पिछले टेंडरों को ही स्वीकृत कर वर्क ऑर्डर जारी करवा दिए। 

नगर आयुक्त की गैर मौजूदगी में मेयर विनोद अग्रवाल ने शहर के विकास कार्यो से जुड़ी लगभग चार सौ पेंडिंग फाइलों को भी स्वीकृत करवा कर कार्य शुरू करने का आदेश दे दिया, नगर आयुक्त के मुताबिक उनके द्वारा विकास कार्यो से सम्बंधित फाइलें रोकी नहीं गई थी बल्कि इन फाइलों पर अवर अभियंताओं और अधिशाषी अभियंताओं को इस्टीमेट लगाकर फाइल पूरी करने के आदेश दिए गए थे जिसके चलते फाइलें पास नहीं कि गयी थी, एक साथ चार सौ से ज्यादा फाइलों को पास करने को लेकर हैरान नगर आयुक्त भी अचरज में है कि आखिर महज तीन घण्टे में ऐसा क्या चमत्कार हुआ जो चार सौ फाइलें स्वीकृत कर ली गयी। नगर आयुक्त अवनीश शर्मा के मुताबिक वो आश्चर्य में है की महीनों से फाइलों का इस्टीमेट बनाकर देने वाले कर्मचारियों ने पहले ऐसा चमत्कार क्यों नहीं किया और जो काम महीनों से नहीं हुआ था वो महज कुछ घण्टों में कैसे निपटा लिया गया।

नगर आयुक्त की गैरहाजिरी में एक साथ सैकड़ों फाइलों को स्वीकृत करा कर निशाने पर आए मेयर इस मुद्दे को शहर के विकास से जुड़ा मुद्दा बताकर पल्ला झाड़ रहे है। मेयर विनोद अग्रवाल के मुताबिक फाइलों के पेंडिंग होने से शहर में विकास कार्य रुक गए थे,  मेयर को क्या निगम के वित्तीय अधिकारों में दखल देने का अधिकार है?और क्या फाइलों को पूर्ण औपचारिकता के बाद स्वीकृत कराया गया इसका जबाब देने से मेयर बचते नजर आ रहे है। 
नगर आयुक्त और मेयर के बीच चल रही रस्साकस्सी के बाद हर कोई अपना दांव खेलने में व्यस्त है, नगर निगम बोर्ड की बैठक दोनों दिग्गजों के टकराव के चलते दो बार निरस्त की जा चुकी है ऐसे में सवाल यह उठता है की निगम के मुखिया ओर उनके अधिकारी अगर इसी तरह रस्साकस्सी का यह खेल खेलते रहे तो शहर के लाखों लोगों की उम्मीदों को पूरा कैसे किया जाएगा।

रिपोर्ट
राजकुमार सिंह
मुरादाबाद

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