12 राज्यों में विशेष प्रगाढ पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) कराने का निर्णय, उत्तर प्रदेश भी शामिल
पुनरीक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना कि सभी पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में सम्मिलित हों
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को शुद्ध व समावेशी बनाने के लिए विशेष प्रगाढ पुनरीक्षण (SIR) का कार्य 28 अक्टूबर, 2025 दिन मंगलवार से शुरू होगा
किसी भी मतदेय स्थल पर 1200 से अधिक मतदाता न हों
कार्यालय मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश ने दी जानकारी
लखनऊ: 27 अक्टूबर, 2025 : मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग ने विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) के द्वितीय चरण में देश के 12 राज्यों में विशेष प्रगाढ पुनरीक्षण कराने का निर्णय लिया है। इन राज्यों में उत्तर प्रदेश भी शामिल है। यह पुनरीक्षण आयोग द्वारा जारी किये गये दिशा-निर्देशों और समय-सारणी के अनुसार आयोजित किया जायेगा। इस विशेष प्रगाढ पुनरीक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में सम्मिलित हों।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि प्रदेश में इसके पहले विशेष प्रगाढ पुनरीक्षण वर्ष 2003 में हुआ था। लगभग 22 वर्ष के अंतराल के बाद पुनः भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार की जा रही है। उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को शुद्ध व समावेशी बनाने के लिए विशेष प्रगाढ पुनरीक्षण (SIR) का कार्य 28 अक्टूबर, 2025 दिन मंगलवार से शुरू होगा।
https://x.com/ECISVEEP/status/1982768411034923321?t=3UrVbnb2s-kwo-2F_tVJVw&s=19
भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार सर्वप्रथम 28 अक्टूबर से 03 नवम्बर, 2025 तक विशेष प्रगाढ पुनरीक्षण (SIR) से संबंधित तैयारी, प्रशिक्षण एवं गणना प्रपत्रों का मुद्रण किया जायेगा। 04 नवम्बर से 04 दिसम्बर 2025 तक बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर गणना प्रपत्रों का मतदाताओं को वितरण किया जायेगा एवं प्रपत्रों को भरवाकर प्राप्त किया जायेगा। 09 दिसम्बर, 2025 को आलेख्य मतदाता सूची का प्रकाशन होगा। दावे और आपत्तियां दाखिल किये जाने की अवधि 09 दिसम्बर, 2025 से 08 जनवरी, 2026 तक होगी। नोटिस जारी किये जाने, सुनवाई एवं सत्यापन व दावे और आपत्तियों का निस्तारण एवं गणना प्रपत्रों पर निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा निर्णय किये जाने की अवधि 09 दिसम्बर, 2025 से 31 जनवरी, 2026 तक होगी। 07 फरवरी, 2026 को अन्तिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि विशेष प्रगाढ पुनरीक्षण को लेकर प्रदेश में सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गयी है। इसके लिए सभी जिला निर्वाचन अधिकारी, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी तथा बूथ लेविल अधिकारी को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। उन्होंने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्देश दिये गये हैं कि किसी भी मतदेय स्थल पर 1200 से अधिक मतदाता न हों, इसके लिए मतदेय स्थलों के सत्यापन एवं सम्भाजन की प्रक्रिया भी इस दौरान पूर्ण की जायेगी। उत्तर प्रदेश में वर्तमान में लगभग 15.44 करोड़ मतदाता तथा 1.62.486 मतदेय स्थल है। प्रदेश में 75 जिला निर्वाचन अधिकारी, 403 निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, 2,042 सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और 1,62,486 बूथ लेवल अधिकारी कार्यरत हैं।
https://x.com/ceoup/status/1982849530908364831?t=L_nYzA72eaVeDUXc11FcBA&s=08
https://www.youtube.com/live/v3jwbffAJrE?si=v3XcPz2pki1d80HF
आज चुनाव आयोग ने 12 राज्यों में SIR की घोषणा की।
अभी तक बिहार में हुए SIR से जुड़े सवालों के जवाब हमें नहीं मिले हैं। हालात ये थे कि SIR को दुरुस्त करने के लिए सुप्रीम कोर्ट को आगे आना पड़ा।
बिहार के SIR से चुनाव आयोग और BJP की नीयत पूरे देश के सामने आ चुकी है।
जब भी SIR होता है, चुनाव आयोग के कर्मचारी हर घर जाते हैं, नए वोटरों को जोड़ते हैं और जिन्हें डिलीट करना होता है, उन्हें डिलीट करते हैं।
राहुल गांधी जी के आलंद विधानसभा से जुड़े 'वोट चोरी' के खुलासे के बाद SIT ने बताया है कि वोटर लिस्ट से नाम काटने का एक सेंट्रलाइज्ड ऑपरेशन किया जा रहा था।
इन सारे मामलों के बीच चुनाव आयोग द्वारा SIR करवाना संदेह के घेरे में है, मंशा ठीक नहीं लगती। विपक्ष और वोटर- दोनों ही संतुष्ट नहीं हैं।
: AICC मीडिया और पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन @Pawankhera
https://x.com/INCIndia/status/1982786078223290521?t=Isy3vPdFqEEybbmwRlv5Pw&s=19






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