लखनऊ : हज यात्रियों पर 'डिफरेंशियल एयरफेयर' के नाम पर ₹10,000 का अतिरिक्त बोझ डालने का विरोध
लखनऊ : हज जैसे मुकद्दस फर्ज़ की अदायगी के लिए जा रहे गरीब मुसलमानों पर 'डिफरेंशियल एयरफेयर' के नाम पर ₹10,000 का अतिरिक्त बोझ डालने के फैसले ने विवाद का रूप ले लिया है। पसमांदा मुस्लिम समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री अनीस मंसूरी ने सरकार और हज कमेटी को आड़े हाथों लिया।
श्री मंसूरी ने एक बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि, "22 अप्रैल को जब उत्तर प्रदेश राज्य हज कमेटी के चेयरमैन दानिश आजाद अंसारी और अन्य सदस्यों ने आज़मीन-ए-हज को रवाना किया था, तभी हम समझ गए थे कि इस पवित्र सफर में कोई बहुत बड़ी बाधा आने वाली है। हमारी वह शंका बिल्कुल सच साबित हुई। सरकार ने रवानगी के आखिरी चरण में हर हज यात्री पर ₹10,000 का आर्थिक 'कर्ज़' ठोक दिया है।"
पसमांदा तबके की मेहनत का अपमान
श्री मंसूरी ने कहा कि उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश से हज पर जाने वाले अधिकांश आज़मीन पसमांदा तबके से आते हैं, जो सालों तक अपनी पाई-पाई जोड़कर इस पाक सफर की रकम जुटाते हैं। मंसूरी ने तीखे लहजे में सवाल उठाया "जब हज का बजट महीनों पहले तय हो चुका था, तो रवानगी के समय यह अवैध वसूली किस आधार पर की जा रही है?
मंत्री और अधिकारियों पर नाराज़गी
अनीस मंसूरी ने स्पष्ट रूप से केंद्रीय मंत्री किरन रिजीजू और हज कमेटी ऑफ इंडिया के सीईओ शनवास सी. को लेकर कहा कि उन्हें देश के सामने इस वसूली का वास्तविक आधार बताना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि फैसलों की जवाबदेही से बचने के लिए अधिकारियों के हस्ताक्षरों का सहारा लेना एक कायराना रणनीति है। श्री मंसूरी ने उत्तर प्रदेश राज्य हज कमेटी और टीम की खामोशी पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने मांग की कि हज कमेटी ऑफ इंडिया के इस 'कुत्सित कृत्य' की कड़े शब्दों में निंदा करें। हाजियों के हक के लिए आवाज उठाते हुए इस ₹10,000 की बढ़ोतरी को वापस लेने की तत्काल मांग करें। अनीस मंसूरी ने कहा कि पसमांदा मुस्लिम समाज इस अन्याय को बर्दाश्त नहीं करेगा। यदि यह आदेश वापस नहीं लिया गया और वसूली गई राशि लौटाई नहीं गई, तो यह केवल एक आर्थिक बोझ का मामला नहीं रहेगा।

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