डीएमओ पर सरकार के एक्शन से सिद्ध हुआ कि जनहित की आवाज़ अनसुनी नहीं होती : अनीस मंसूरी
लखनऊ : जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी संजय मिश्रा से जुड़े प्रकरण में शासन स्तर पर कार्रवाई की दिशा में हुई प्रगति के बाद पसमांदा मुस्लिम समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री अनीस मंसूरी ने कहा कि घटनाक्रम इस बात का संकेत है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में तथ्यों और जनहित के आधार पर उठाई गई आवाज़ अंततः सुनी जाती है।
अनीस मंसूरी ने कहा कि उन्होंने सबसे पहले इस विषय को सार्वजनिक रूप से उठाते हुए यह प्रश्न रखा था कि सरकारी निरीक्षण, प्रशासनिक गतिविधियों तथा संवेदनशील संस्थानों से जुड़े कार्यक्रमों को व्यक्तिगत प्रचार या सोशल मीडिया प्रस्तुति का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। उनका मानना था कि सरकारी सेवा का मूल उद्देश्य जनसेवा और जवाबदेही है तथा उसकी गरिमा हर परिस्थिति में बनी रहनी चाहिए।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी संजय मिश्रा से जुड़े सोशल मीडिया रील प्रकरण में शासन स्तर पर कार्रवाई की प्रक्रिया तेज होने के बीच पसमांदा मुस्लिम समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री अनीस मंसूरी ने इसे संस्थागत जवाबदेही और प्रशासनिक मर्यादा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। उन्होंने कहा कि इस विषय को सबसे पहले उठाने का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष का विरोध नहीं बल्कि व्यवस्था की गरिमा बनाए रखना था।
उन्होंने कहा कि शासन द्वारा शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जांच कराना और संबंधित रिपोर्ट तलब करना यह दर्शाता है कि सरकार प्रशासनिक आचरण और संस्थागत मर्यादाओं को लेकर सजग है। उन्होंने इस प्रक्रिया का स्वागत करते हुए कहा कि इससे यह संदेश जाएगा कि सार्वजनिक पदों पर कार्यरत प्रत्येक अधिकारी के लिए जवाबदेही और मर्यादा सर्वोपरि है।
अनीस मंसूरी ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष के प्रति कटुता या व्यक्तिगत टिप्पणी करना कभी नहीं रहा। उनका प्रयास केवल इतना था कि सरकारी दायित्वों और सार्वजनिक आचरण के बीच आवश्यक संतुलन बना रहे तथा बच्चों, शैक्षणिक संस्थानों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की गरिमा अक्षुण्ण रहे।
उन्होंने कहा कि यदि किसी शिकायत के बाद शासन स्तर पर कार्रवाई की दिशा में कदम उठे हैं तो इसका श्रेय लोकतांत्रिक व्यवस्था, संवेदनशील प्रशासन और समाज की जागरूकता को जाता है। साथ ही उन्होंने उन सभी लोगों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने तथ्यों और शालीन तरीके से इस विषय को सामने लाने में सहयोग किया।
अनीस मंसूरी ने कहा कि यह समय किसी की आलोचना का नहीं बल्कि एक सकारात्मक संदेश लेने का है कि शासन व्यवस्था में नियम, जवाबदेही और प्रशासनिक अनुशासन सर्वोपरि हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में सभी अधिकारी अपने दायित्वों का निर्वहन करते समय प्रशासनिक गरिमा, सामाजिक संवेदनशीलता और जनविश्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे।

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