"हज़रत मोहम्मद साहब सम्पूर्ण मानवता के शिक्षक हैं" – प्रो. अब्बास अली महदी
ज़ाइस फाउंडेशन द्वारा "मुअल्लिम-ए-इंसानियत" सम्मेलन का आयोजन
लखनऊ : समाज को सही दिशा में ले जाने के लिए यह ज़रूरी है कि हम हज़रत मोहम्मद साहब की शिक्षाओं को समझें और उन्हें अपने जीवन में उतारें। उनकी शिक्षाएँ न केवल मार्गदर्शन हैं बल्कि एक आदर्श समाज की नींव भी हैं। इनके बिना समाज में सच्ची तरक्की संभव नहीं है।
उक्त विचार ईरा यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर अब्बास अली महदी ने "ज़ाइस फाउंडेशन" द्वारा आयोजित एक दिवसीय सम्मेलन "मुअल्लिम-ए-इंसानियत" में अध्यक्षीय भाषण के दौरान व्यक्त किए।
अध्यापक दिवस और रबीउल अव्वल के पवित्र महीने के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षा और शोध के क्षेत्र में सक्रिय व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम उत्तर प्रदेश प्रेस क्लब में आयोजित हुआ। विशिष्ट अतिथि दारुल उलूम नदवतुल उलेमा लखनऊ के वरिष्ठ शिक्षक डॉ. अबू सुहबान रूहुल क़ुद्स नदवी ने अपने वक्तव्य में जीवन में सीरत (नबी की जीवनी) के अध्ययन को आवश्यक बताया और इसके विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। यूनिटी कॉलेज के प्रबंधक डॉ. सैय्यद कल्बे सिब्तैन नूरी ने कहा कि आज जब समाज में नैतिक मूल्यों का क्षय हो रहा है, हमें पैगंबर मोहम्मद की शिक्षाओं को आम करना चाहिए और सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने में अपना योगदान देना चाहिए। लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व प्रोफेसर साबिरा हबीब ने आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि आज के दौर में इस तरह के कार्यक्रमों की अत्यंत आवश्यकता है। हमें अपने व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में पैगंबर की करुणामयी शिक्षाओं को शामिल करना चाहिए और समाज के हर वर्ग तक पहुंच बनानी चाहिए।
शाहीन इस्लाम (एसोसिएशन ऑफ प्रोफेशनल मुस्लिम्स की संयोजक) ने नई पीढ़ी की शिक्षा व नैतिक विकास को लेकर समाज की उदासीनता पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जब तक नई पीढ़ी नैतिक मूल्यों से परिपूर्ण नहीं होगी, तब तक एक आदर्श समाज का निर्माण नहीं हो सकता। उर्दू विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय के अध्यक्ष प्रोफेसर अब्बास रज़ा नय्यर ने हज़रत मोहम्मद को "मानवता का सबसे बड़ा शिक्षक" बताया। उन्होंने कहा कि इतिहास में ऐसा कोई शिक्षक नहीं हुआ जिसने इतने कम समय में इतने लोगों को शिक्षित कर, उन्हें उत्कृष्ट मानवीय मूल्यों तक पहुँचाया हो।
प्रोफेसर हमा याक़ूब (मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी, लखनऊ कैंपस) ने नबी की शिक्षाओं में स्त्री शिक्षा के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि बेटियों की शिक्षा पर ध्यान देना समाज की नींव मजबूत करने जैसा है। ज़ाइस फाउंडेशन के निदेशक मौलाना क़मरुज़्ज़मां नदवी ने अपने स्वागत भाषण में फाउंडेशन के कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों में फाउंडेशन ने हज़ार से अधिक छात्रों का मार्गदर्शन किया है जो उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
जिन अन्य वक्ताओं ने कार्यक्रम में अपने विचार रखे :
तबस्सुम किदवई (पूर्व प्राचार्य, तालीमगाह-ए-निस्वां), डॉ. इदरीस नदवी (सहायक प्रोफेसर, लखनऊ विश्वविद्यालय), कारी रज़ीउद्दीन सिद्दीकी (नाज़िम, जामिया हफ़्सा लिलबनात), मौलाना मुस्तफ़ा मदनी (अध्यक्ष, अलनूर फाउंडेशन), मुफ्ती मुनव्वर सुल्तान नदवी (उस्ताद, नदवतुल उलेमा), डॉ. अमार अनीस नग़रामी।
कार्यक्रम की शुरुआत कारी मुख्तार अबरारी की क़ुरआन पाठ और शादाब जावेद की नात से हुई। समापन मौलाना क़मरुज़्ज़मां नदवी के धन्यवाद ज्ञापन के स इस अवसर पर ज़ाइस फाउंडेशन द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 16 युवाओं को सम्मान पत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम के आयोजन में मौलाना मसऊद आलम नदवी, मौलाना अलजैश नदवी, जमशेद आलम नदवी, ताबिश अख्तर, अमानुल्लाह नदवी, मोहम्मद तौफ़ीक़ ख़ान आदि की भूमिका सराहनीय रही।
रिपोर्ट : आमिर रिज़वी, 9335280142


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