बिजनौर : जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला गंगा समिति, जिला पर्यावरण समिति एवं मानव वन्य जीव संघर्ष समिति की बैठक हुई
गंगा नदी में न गिरने पाए नालों का पानी, अनटैप्ड नालों के लिए तत्काल करें अस्थाई व्यवस्था : जिलाधिकारी
गंगा किनारे के ग्रामों में विशेष सफाई अभियान चलाने तथा निजी अस्पतालों में बायोमेडिकल वेस्ट का समुचित निस्तारण सुनिश्चित कराने के निर्देश
रिपोर्ट शकील अहमद बिजनौर
बिजनौर, 28 अक्टूबर : जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में जिला गंगा समिति, जिला पर्यावरण समिति एवं मानव वन्य जीव संघर्ष समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में गंगा नदी को प्रदूषण मुक्त रखने, नालों के पानी का समुचित निस्तारण करने, गंगा किनारे स्थित ग्रामों में साफ-सफाई की व्यवस्था सुदृढ़ करने, बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण तथा मानव-वन्य जीव संघर्ष की स्थिति से निपटने के संबंध में विस्तृत समीक्षा की गई।
जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्राम स्तर पर गठित ग्राम गंगा समितियों को सक्रिय एवं क्रियाशील बनाया जाए, ताकि गंगा संरक्षण से संबंधित कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सके। उन्होंने जिला पंचायत राज अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी तथा अधिशासी अभियंता, जल निगम (शहरी) को निर्देशित किया कि जनपद में गंगा नदी में गिरने वाले अनटैप्ड नालों के लिए तत्काल अस्थाई व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। किसी भी स्थिति में नालों का दूषित पानी सीधे गंगा नदी में नहीं गिरना चाहिए। उन्होंने नगरीय क्षेत्रों में निर्माणाधीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का कार्य युद्धस्तर पर पूर्ण कराने के निर्देश भी दिए, जिससे नालों के पानी का समुचित शोधन किया जा सके।
जिलाधिकारी ने कहा कि गंगा किनारे स्थित ग्रामों में विशेष सफाई अभियान चलाया जाए तथा ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित रूप से कूड़ा उठान सुनिश्चित किया जाए। गांवों में साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने के साथ ही गंगा संरक्षण के प्रति जनसामान्य को जागरूक किया जाए। उन्होंने निजी अस्पतालों में बायोमेडिकल वेस्ट के सुरक्षित संग्रहण एवं नियमानुसार निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित कराने के निर्देश देते हुए कहा कि नियमों का पालन नहीं करने वाले अस्पतालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन सभी व्यवस्थाओं की प्रगति सुनिश्चित करते हुए अगले 15 दिनों में पुनः समीक्षा की जाएगी।
मानव-वन्य जीव संघर्ष की समीक्षा के दौरान जिला वन अधिकारी ने अवगत कराया कि वर्ष 2026 में अब तक जनपद में 64 गुलदारों का रेस्क्यू किया गया है। उन्होंने बताया कि जनपद में गुलदारों को पकड़ने के लिए कुल 124 पिंजरे उपलब्ध हैं, जिनमें 52 पिंजरे वन विभाग के तथा 72 पिंजरे राजस्व व अन्य विभाग के माध्यम से उपलब्ध कराए गए हैं। गुलदार से संबंधित शिकायत प्राप्त होने पर आवश्यकता के अनुसार संबंधित स्थान पर पिंजरे लगाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था के सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं।
बैठक में अवगत कराया गया कि जनपद में कुल 46 गंगा ग्राम हैं, जो चार विकास खंडों में स्थित हैं। इन ग्रामों के अंतर्गत गंगा नदी की कुल लंबाई लगभग 115 किलोमीटर है। जनपद में विदुर कुटी, नांगल सोती, दतियाना तथा बालावाली घाट सहित अन्य प्रमुख क्षेत्र गंगा संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। इसके अतिरिक्त जनपद में 16 छोटी-बड़ी सहायक नदियां हैं। बैठक में बताया गया कि जनपद में कुल 91 नाले हैं, जिनमें से 20 नाले टैप्ड हैं, जबकि 71 नाले अभी अनटैप्ड हैं।
जल निगम (शहरी) द्वारा जनपद में चार सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कराया जा रहा है तथा पांचवें एसटीपी को भी स्वीकृति मिल चुकी है। इनके माध्यम से विभिन्न नालों के पानी का शोधन कर गंगा नदी में प्रदूषण की रोकथाम में सहायता मिलेगी। जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि गंगा संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा एवं मानव-वन्य जीव संघर्ष की रोकथाम से जुड़े कार्यों में आपसी समन्वय के साथ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करें।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी, जिला वन अधिकारी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।




Post a Comment