बिजनौर : महर्षि वाल्मीकि जयंती पर 26 अक्टूबर को जनपद में होंगे विविध सांस्कृतिक एवं धार्मिक कार्यक्रम
नगर पालिका ,नगर पंचायत व ब्लॉकों में 54 अलग-अलग स्थान पर होंगे कार्यक्रम
रिपोर्ट शकील अहमद बिजनौर
बिजनौर, 24 अक्टूबर। शासन के निर्देशों के क्रम में 26 अक्टूबर 2026 को महर्षि वाल्मीकि जयंती के शुभ अवसर पर जनपद बिजनौर की 18 नगर पालिका व नगर पंचायतों में एक-एक स्थान पर एवं 11 विकास खंडों मे 36 अलग-अलग स्थानों पर कुल 54 स्थानों पर विविध धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इन कार्यक्रमों के माध्यम से महर्षि वाल्मीकि के आदर्शों, विचारों एवं सामाजिक मूल्यों का प्रचार-प्रसार करते हुए आमजन को रामायण में निहित मानवीय मूल्यों, सामाजिक समरसता तथा राष्ट्रीय आदर्शों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
मुख्य विकास अधिकारी रणविजय सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि कार्यक्रमों के अंतर्गत चयनित 29 मंदिरों एवं अन्य महत्वपूर्ण स्थलों पर दीप प्रज्ज्वलन, रामायण पाठ, भजन-कीर्तन तथा अन्य भक्तिमय सांस्कृतिक आयोजन किए जाएंगे। प्रमुख स्थलों पर निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 8, 12 अथवा 24 घंटे के अखंड वाल्मीकि रामायण पाठ का आयोजन भी कराया जाएगा। इसके अतिरिक्त श्रीराम, श्रीहनुमान एवं रामायण से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण मंदिरों तथा स्थलों पर भी धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने की कार्यवाही की जाएगी।
जिला पंचायत राज अधिकारी बिजनौर डॉ. प्रीतम सिंह ने बताया कि संबंधित विभागों एवं आयोजकों को कार्यक्रम स्थलों पर साफ-सफाई, पेयजल, सुरक्षा, ध्वनि एवं प्रकाश व्यवस्था सहित सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही कार्यक्रमों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं आमजन की सहभागिता सुनिश्चित करते हुए महर्षि वाल्मीकि के जीवन, विचारों और आदर्शों से लोगों को परिचित कराया जाएगा।
कार्यक्रमों से संबंधित आवश्यक विवरण एवं छायाचित्र संस्कृति विभाग के निर्धारित पोर्टल पर उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि आयोजनों का अभिलेखीकरण एवं व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित किया जा सके।
जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने संबंधित अधिकारियों एवं आयोजकों को निर्देशित किया है कि महर्षि वाल्मीकि जयंती के सभी कार्यक्रम गरिमापूर्ण, सुव्यवस्थित एवं जनसहभागिता के साथ आयोजित किए जाएं। उन्होंने अपेक्षा की कि इन आयोजनों के माध्यम से महर्षि वाल्मीकि के आदर्शों तथा रामायण के प्रेरणादायी संदेश को जन-जन तक पहुंचाया जाए और समाज में नैतिक मूल्यों, सामाजिक समरसता एवं सद्भाव को बढ़ावा दिया जाए।

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