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बिजनौर : विभाजन के समय पश्चिम भारत के पंजाब के पाकिस्तान से उत्तर प्रदेश के बिजनौर के नगीना व धामपुर में लगभग 13 ग्रामों में बसे शरणार्थी परिवारों की गुहार

बिजनौर : विभाजन के समय पश्चिम भारत के पंजाब के पाकिस्तान से उत्तर प्रदेश के बिजनौर के नगीना व धामपुर में लगभग 13 ग्रामों में बसे शरणार्थी परिवारों की गुहार

रिपोर्ट : शकील अहमद, बिजनौर 

देश विभाजन के समय पश्चिम भारत के पंजाब इलाके के पाकिस्तान के हिस्से से निर्वासित होकर उत्तर प्रदेश के जनपद बिजनौर की तहसील नगीना व धामपुर मे लगभग 13 ग्रामों में आकर बसे शरणार्थी परिवारों के एक दर्जन से अधिक ग्रामीणों ने डीएम को महामहिम राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन देकर इंसाफ की गुहार लगाई है।

बिजनौर : विभाजन के समय पश्चिम भारत के पंजाब के पाकिस्तान से उत्तर प्रदेश के बिजनौर के नगीना व धामपुर में लगभग 13 ग्रामों में बसे शरणार्थी परिवारों की गुहार


ज्ञापन में कहा 1947 से 1950 में आकर बसे शरणार्थी परिवारों की लगभग 78 वर्षों से चार पीढ़ियां व तीन पीढियां निवास करती चली आ रही है विभिन्न श्रेणियां की सरकारी भूमि पर कृषि कार्य कर अपने परिवार का गुज़र बसर करते चले आ रहे हैं। 

जिन जमीनों पर देश की आजादी के समय से उक्त शरणार्थी परिवारों की भूमिधरी हक पानी की मांग के अनुसार वर्ष 2018 से प्रशासनिक कार्रवाइयों के अंतर्गत शासनादेश लखनऊ 2020 के अनुसार कब्ज व आवासीय भूमि पर स्थापित किए जाने हेतु चल रही कार्रवाइयों व शासनादेश उत्तर प्रदेश शासन अनुभाग लखनऊ 2020 के अंतर्गत उक्त समस्या के समाधान हेतु चली कार्रवाइयों के अनुसार कृषकों के कब्जे को आधार मानकर उक्त के अनुसार कराए गए सर्वे जिन पर किसानों के कब्जे के अनुसार ही मालिकाना हक दिलाने की बात शासन व प्रशासन द्वारा कही जाती रही है।





जिसके समाधान एवं निस्तारण हेतु उत्तर प्रदेश राजस्व सहिंता द्वितीय संशोधन अध्यादेश 2026 उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 का अग्रतर संशोधन करने के लिए अध्यादेश जिसमें जनपद बिजनौर तहसील नगीना के ग्रामों ग्राम भोगपुर ग्राम कुआं खेड़ा ग्राम चंपातपुर चकला ग्राम मधुपुरी व धामपुर तहसील के ग्राम फतेहपुर धारा रसूलपुर आबाद व इस्लामनगर आदि ग्रामों के राज्य सरकार की किसी भूमि पर जिसका खेती हर कब्जा हो परंतु यह है की प्रति परिवार एक एकड़ से अधिक जोत पर असंक्रमणीय भूमिधर के अधिकार प्रदान नहीं किए जाएंगे। इस अध्यादेश से सभी काबिज काश्त व आवासीय किसानों को उनके तीन पीढ़ियां से ज्यादा समय से काबिज़ परिवारों उनके कब्जे की भूमि से वंचित होना पड़ेगा। जो हम किसानों को स्वीकार नहीं है।

उक्त समस्या का समाधान हेतु हम समस्त किसान निम्नलिखित शर्तें नियमों के अनुसार समाधान किया जाना जनहित में न्याय हित में करवाना अति आवश्यक है।

1- सरकार द्वारा किसानों को उनके कब्जे का पूरी भूमि पर अधिकार दिया जाए।जिस किसान का जितनी भूमि पर कब्जा है उसकी उतनी भूमि पर मालिकाना हक दिया जाए।

2- उत्तर प्रदेश में पूर्व में प्रचलित व्यवस्था के अनुसार 3.12 एकड़ भूमि का आवंटन किया जाता रहा है।इसलिए अपनी भूमि पर काबिज़ प्रत्येक बालिक व्यक्ति को 3 पॉइंट 12 एकड़ भूमि का आवंटन कब्जे के अनुसार किया जाना अति आवश्यक है।

3- पूर्व सरकार द्वारा तहसील धामपुर के ग्राम रसूलपुर आबाद इस्लामनगर तुरंतपुर अजीमुल्ला नगर कल्लू वाला मीरापुर मोदीवाला आदि ग्रामों में 10-10 एकड़ कृषि भूमि का आवंटन किया गया था,इसलिए वर्तमान में भी कब्जे के आधार पर एक एकड़ से अधिक रकबे का आवंटन किया जा सकता है।

4- जनपद बिजनौर की तहसील बिजनौर के अंतर्गत देश विभाजन के समय आकर बसे बंगाली शरणार्थी परिवारों को प्रति परिवार दी गई 6 एकड़ भूमि वर्ष 1959-60 के अनुसार कब्जे के आधार पर प्रत्येक शरणार्थी परिवार को 6 एकड़ भूमि दी जाए।

5- ग्राम भोगपुर चंपातपुर चकला मधुपुरी जो कि वर्ष 19,59 फसली फसली में जंगल द्रखतान झाड़ी व कृषि योग्य बंजर भूमि आदि खतौनी में दर्ज है।

इन तीन ग्रामों को कब्जे के आधार पर वन अधिकारी अधिनियम 2006 के अंतर्गत प्रति परिवार एक हेक्टेयर भूमि तीन पीढ़ीयो से पूर्व काबिज परिवारों को कृषि भूमि व आधा एकड़ आवासीय भूमि आवंटन किए जाने का कानून अधिकार बनता है। क्योंकि उक्त परिवार उक्त भूमि पर 78 वर्षों से पीढ़ी दर पीढ़ी काबिज़ चले आ रहे हैं।

बाइट - पीड़ित


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