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बिजनौर पुलिस ने हीमपुर थाना क्षेत्र क्षेत्र की पटाखा फ़ैक्ट्री पर छापा मारकर दो लोगों को गिरफ्तार किया

बिजनौर पुलिस ने हीमपुर थाना क्षेत्र क्षेत्र की पटाखा फ़ैक्ट्री पर छापा मारकर दो लोगों को गिरफ्तार किया

रिपोर्ट : शकील अहमद, बिजनौर 

बिजनौर पुलिस ने हीमपुर थाना क्षेत्र क्षेत्र की पटाखा फ़ैक्ट्री पर छापा मारकर दो लोगों को गिरफ्तार किया




बिजनौर पुलिस ने हीमपुर थाना क्षेत्र क्षेत्र की पटाखा फैक्टरी पर छापा मारकर दो लोगों को गिरफ्तार किया इस पटाखा फैक्ट्री का लाइसेंस आशीष बालियान के नाम पर है इस मामले में पुलिस ने आशीष से भी पूछताछ की है बजरंग पटाखा फैक्ट्री को मोहम्मद यूसुफ और गुफरान ने ठेके पर लेकर काम चला रखा था

बताया जाता है कि इस फैक्ट्री में अनुमति से अधिक विस्फोटक सामग्री पुलिस ने बरामद की है जिसमें इसमें 548 किलोग्राम पोटेशियम नाइट्रेट और 569 किलोग्राम सल्फर जैसा विस्फोटक सामग्री बरामद हुई 

स्पेक्ट्रम में लगभग 1200 से 1300 किलोग्राम विस्फोटक मिला है जिसको लेकर पुलिस टीम पूरी जांच पड़ताल में जुट गई है इस फैक्ट्री में 315 बोर और 32 बोर के कारतूस में भी पाउडर भरकर तैयार किया जा रहा था पुलिस ने नौकरी खास की सूचना पर छापा मार कर बड़ी मात्रा में भंडार किए गए विस्फोटक सामग्री को बरामद करने का दावा किया है 

पुलिस लाइन के मीटिंग हॉल में मीडिया को ब्रीफिंग करते हुए एसपी के के बिश्नोई ने बताया पटाखा फैक्ट्री को चलाने वाले मोहम्मद यूसुफ निवासी मोहल्ला पीर शहीद कला नहटौर और गुफरान अहमद अंसारी निवासी नहटौर को गिरफ्तार कर लिया राजस्व विभाग अग्निशमन और फील्ड यूनिट की संयुक्त चेकिंग में फैक्ट्री से अल्मुनियम पाउडर 130 किलोग्राम, गंधक 559 किलोग्राम और पोटेशियम नाइट्रेट परसों 548 किलोग्राम बरामद किया गया है कुल मिलाकर 1300 किलोग्राम विस्फोटक बरामद हुआ 

कच्चा माल रखने की 50 किलोग्राम की ही अनुमति थी जबकि मौके पर 1300 किलोग्राम विस्फोटक भंडारण करके रखा गया था उल्लेखनीय है कि फैक्ट्री में सुतली बम 39 क्विंटल और 59 किलो ग्राम बरामद हुए हैं इस पटाखा फैक्ट्री में 13 कारतूस और 23 कारतूस के खोखे मौके से बरामद हुए हैं

एसपी ने बताया कि सुतली बम की सप्लाई महाराष्ट्र में भी की जाती है आरोपी मोहम्मद यूसुफ को मुला बम के नाम से भी जाना जाता है जो आतिशबाजी बनाने का एक्सपर्ट है इस फैक्ट्री में बिना बिल और बिना जीएसटी के बड़ी मात्रा पर खरीद परोपकार कारोबार चल रहा था आतिशबाजी बनाने के लिए जो कच्चा माल खरीदा था उसका पक्का बिल नहीं होता था



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