बिजनौर : गंगा में उफान, दो दर्जन गांव में बाढ़ जैसे हालात
रिपोर्ट : शकील अहमद, बिजनौर
बिजनौर में गंगा का जलस्तर बढ़ने से खादर क्षेत्र में बाढ़ के हालात गंभीर हो गए हैं। पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश का असर अब गंगा के जलस्तर पर साफ दिखाई दे रहा है। जलीलपुर ब्लॉक के करीब दो दर्जन गांव बाढ़ की चपेट में हैं और कई गांव चारों तरफ से पानी से घिरकर टापू में तब्दील हो गए हैं। हालात ये हैं कि कई घरों में पानी घुस चुका है, संपर्क मार्गों पर कई फीट पानी बह रहा है जिससे जन जीवन अस्त व्यस्त हो गया है और ग्रामीण ट्रैक्टर के सहारे आवाजाही करने को मजबूर हैं। वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि मुसीबत की इस घड़ी में प्रशासन और जनप्रतिनिधि उनकी सुध नहीं ले रहे हैं।
बिजनौर के जलीलपुर खादर इलाके में गंगा के बढ़ते जलस्तर ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। रात से गंगा के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी के बाद खेतों में भरा पानी अब आबादी की तरफ बढ़ने लग जलीलपुर ब्लॉक के करीब दो दर्जन गांव बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। गांवों के चारों तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है और ये गांव टापू में तब्दील हो गए हैं। आबादी के बाहरी छोर पर बसे कई लोगों के घरों में भी बाढ़ का पानी घुस चुका है।
सलेमपुर खादर-जलीलपुर संपर्क मार्ग पर करीब तीन फीट तक पानी भर गया है। देर रात से यह मार्ग पूरी तरह बंद है। बाढ़ के पानी की वजह से मुख्य रूप से सलेमपुर खादर, फैजीपुर, महमूदा खादर, सादाबाद, मीरापुर, सीकरी, बलिया नंगली, धीवरपुरा, बीरोपुर, जलीलपुर, छाछरी मोड़ और विजयनगर समेत एक दर्जन से ज्यादा गांवों का संपर्क प्रभावित हो गया है।
छाछरी मोड़ से जलीलपुर का सीधा संपर्क भी कट गया है। वहीं नौ गांवों के संपर्क मार्गों पर अब ट्रैक्टर ही ग्रामीणों के लिए सहारा बना हुआ है।बाढ़ की भयावह तस्वीर सलेमपुर खादर से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर विजयनगर गांव के डेरों में भी दिखाई दे रही है। यहां डेरों के चारों तरफ कई फीट पानी जमा है और पानी ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया है। चारों तरफ पानी भरा होने के कारण ग्रामीण अपने घरों में रहने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के कारण आने-जाने का रास्ता बंद है। बच्चों का स्कूल जाना बंद हो गया है। घर का राशन लाने में भी काफी परेशानी हो रही है। प्रशासन को हमारी मदद करनी चाहिए।
बाढ़ के कारण सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को हो रही है। बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, वहीं रोजमर्रा का सामान और राशन लाने के लिए भी ग्रामीणों को पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है।ग्रामीण अपने निजी ट्रैक्टरों के जरिए लोगों को पानी से निकालकर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचा रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि हालात लगातार बिगड़ रहे हैं, लेकिन अभी तक न तो कोई जनप्रतिनिधि उनकी सुध लेने पहुंचा और न ही प्रशासन की ओर से पर्याप्त मदद दिखाई दे रही है। सबसे बड़ी चिंता इमरजेंसी की स्थिति को लेकर है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति की तबीयत अचानक बिगड़ जाए या किसी महिला को प्रसव जैसी स्थिति में अस्पताल ले जाना पड़े तो बाढ़ के बीच एंबुलेंस पहुंचना भी मुश्किल है।फिलहाल गंगा के बढ़ते जलस्तर ने खादर क्षेत्र के ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीण प्रशासन से राहत और बचाव की व्यवस्था किए जाने की मांग कर रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इन बाढ़ प्रभावित गांवों में कब तक राहत पहुंचाता है।
बाइट: भंवर सिंह ग्रामीण
बाइट: हरप्रीत सिंह ग्रामीण
बाइट: अभिषेक गौतम ग्रामीण


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